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बयानगी
मैं: एक छोटा परिचय
Friday, 25 January 2013
मेरे 'इंतज़ार' की ख़बर
ऐसा नहीं है, कि मेरे 'इंतज़ार' की उसे ख़बर नहीं हो,
रुलाना तो खै़र उसकी पुरानी आदतों में ही शुमार है,
गर रूठ कर ही सूकून आता है,तो हम दिल को समझा लेंगें,
दुआ रहेगी हमेशा,तेरी जिंदगी में 'इंतजार' की जगह नहीं हो।
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