ज़ाहिर सी बात है ..........
कुछ दिल की, कुछ दिल से।
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बयानगी
मैं: एक छोटा परिचय
Friday, 2 November 2012
कुछ लिखना भी जुर्म है
इन सर्द रातों में
अजब सुगबुगाहट सी होने लगी है,
लोग आग खोजते हैं,
और हम शबनम
तलाशने लगे हैं !
अब तो कुछ लिखना भी
जुर्म हो चला है,
क्या करें ??
मेरी ग़ज़लों से तेरी सूरत
कुछ इस कदर मिलती है ,
की लोग तुझे
मेरा महबूब तक कहने लगे हैं!!!!
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