Friday, 25 January 2013

हालात

शायद सूखे पत्तों सी हालात है,
किसी ने समेटा भी,
तो सिर्फ "जलाने के लिये"।

दोज़क

तेरी बेरुखी के बाद से, न जाने क्यों,
नामुमकिन सा लगने लगा है सफ़र,
तू साथ देने का झूठा वादा ही कर देता,
फ़कत ये ज़िदगी दोज़क तो न बनती!!!!

मज़लिस-ए-तकदीर

इश्क अगर मेहरबान रहे,
जहान-ए-मुहब्बत गुलिस्तान रहे
मज़लिस-ए-तकदीर के आफ़ताब में,
खडे कसम खाते हैं सनम,
खु़दा से राबता हुआ तो,
यही दुआ मांगेंगे,
जि़दगी की हर सांस पे तेरा नाम रहे.........

मेरे 'इंतज़ार' की ख़बर

ऐसा नहीं है, कि मेरे 'इंतज़ार' की उसे ख़बर नहीं हो,
रुलाना तो खै़र उसकी पुरानी आदतों में ही शुमार है,
गर रूठ कर ही सूकून आता है,तो हम दिल को समझा लेंगें,
दुआ रहेगी हमेशा,तेरी जिंदगी में 'इंतजार' की जगह नहीं हो।