जिस राह पर चल रहे थे,
देखने में काफ़ी सुनसान थी
लेकिन चलते-चलते पसंद आने लगी
शायद दोस्ती हो चली थी उसके साथ
रास्ता काफ़ी स्याह लगता था दूर से
लेकिन हमारा अपना था,
तो कोई एक शब्द भी कह दे तो ,नागवार था हमे,
रौशनी से दूर-दूर तक कोई वास्ता नही था,
लेकिन शायद किस्मत को वो हमारा स्याह अकेलापन रास नही आया
और ना जाने कहा से आई उस अंजान ?????
एक तरन्नुम ने रोशन कर दिया जहाँ ,
आदत नही थी इसीलिए शुरुआत में काफ़ी अटपटा लगा करती थी,
आँखों में चुभती थी,
लेकिन आदत से मजबूर ,क्या करते ????
हर किसी से दोस्ती करने की बुरी आदत जो डाल रखी थी,
उसे भी ना चाहते हुए अपना लिया.....
शायद धीरे से उसकी आदत हो चली थी अब.
लेकिन वक़्त!!!!!!
उस वक़्त को आज भी कोसते हैं,
जिस वक़्त उस रौशनी से मिले
जिस ने राह एक नयी दिखा दी...
और भटका दिया इस,राहगीर को,
जानते हैं किस्मत मे नही है वो
लेकिन इंतेज़ार है आज भी उसका
क्योंकि शायद कही ना कही , इस ज़िंदगी मे
तुझसे राबता रहेगा ही.
काश वापस लौट जाए ये
स्याह राह.....................
देखने में काफ़ी सुनसान थी
लेकिन चलते-चलते पसंद आने लगी
शायद दोस्ती हो चली थी उसके साथ
रास्ता काफ़ी स्याह लगता था दूर से
लेकिन हमारा अपना था,
तो कोई एक शब्द भी कह दे तो ,नागवार था हमे,
रौशनी से दूर-दूर तक कोई वास्ता नही था,
लेकिन शायद किस्मत को वो हमारा स्याह अकेलापन रास नही आया
और ना जाने कहा से आई उस अंजान ?????
एक तरन्नुम ने रोशन कर दिया जहाँ ,
आदत नही थी इसीलिए शुरुआत में काफ़ी अटपटा लगा करती थी,
आँखों में चुभती थी,
लेकिन आदत से मजबूर ,क्या करते ????
हर किसी से दोस्ती करने की बुरी आदत जो डाल रखी थी,
उसे भी ना चाहते हुए अपना लिया.....
शायद धीरे से उसकी आदत हो चली थी अब.
लेकिन वक़्त!!!!!!
उस वक़्त को आज भी कोसते हैं,
जिस वक़्त उस रौशनी से मिले
जिस ने राह एक नयी दिखा दी...
और भटका दिया इस,राहगीर को,
जानते हैं किस्मत मे नही है वो
लेकिन इंतेज़ार है आज भी उसका
क्योंकि शायद कही ना कही , इस ज़िंदगी मे
तुझसे राबता रहेगा ही.
काश वापस लौट जाए ये
स्याह राह.....................
nice one :)
ReplyDeletethank you chandan :)
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