Sunday, 8 January 2012

इक्कीसवी सदी का त्रास "बाप "!!!!!

 पिता ने पुत्र के चरण स्पर्श किये और पूछा "क्या आज्ञा है मेरे लिए ???"
पुत्र ने कहा "हे चिरंजीवी  बाप इस से पहले शुरू करू वार्तालाप .....एक बीडी तो पिलाइए
और पाँव ज़रा धीरे से दबाइए...!!!!

 पिता ने पुत्र की बीडी सुलगाई ..और खुद भी खेंच के ऐसी दम लगाईं की
की बीडी के प्राण-पखेरू उड़ गए .
पुत्र के  होठ मारे गुस्से के सिकुड़ गये..
पुत्र बोला......" अबे तू बाप है या फजीता है ....
भला बेटे के सामने कोई बीडी पिता है ........????
और जोरू के गुलाम,
यूँ ही रोशन करेगा  बेटे का नाम!!
क्या ज़माना आ गया है ....बाप बेटे  के सामने बीडी पिता है,
शर्मदार  बेटा भला इस दुनिया में कैसे जीता है !!

बेटा पिए तो कोई बात नहीं ..आखिर दमे का मरीज़ है ....
कोई इन बापों को समझाओ की आखिर ये भी कोई पीने की चीज़ है ?????

क्यों बे कलयुग के प्रभाव तुझ पर भी पड़ गया है????
मोहल्ले के आवारा बापों के साथ रह-रह कर तू भी बड़ा बिगड़ गया है!!!!

हर हसीं बुढ़िया से इश्क फरमाने लगा है....
और रिडक्शन का माल भी बड़ा भाने लगा है !!!

 ये मास्टर भी हराम का खाते हैं,
ना जाने  इन आवारा बापों को क्या पढ़ाते हैं.....????

अबे सावन के धंधे,
यथार्थ के धरातल पर आ,,,,
फिर जा कल्पना की वादियों में जा लेटा .....
बाप ने कहा- वाह बेटा,
इस इक्कीसवी सदी का त्रास हूँ   ,
दुर्भाग्य से तू मेरा बेटा और में तेरा बाप हूँ .


अतीत हमेशा अपने वर्तमान से हारा है,
शेख मुजीब को भी उसके बेटे ने मारा है...!!! 


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