Friday, 4 November 2011

वक्त

वक्त जब तेरे हाथ से 

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यूँ निकल जाएगा,
नज़रिया जिंदगी का तब,
बदल  जाएगा ,
न  होगा उजाला, रात ही रात होगी ,
थक जाएगा दिन, सूरज ढलेगा, साँझ होगी  
वक्त अपनी मुट्ठी मे कस के  थाम ले ,
तेरा बिगड़ा हुआ हाल भी संभल  जायेगा ,
न डगमगा कदम मिला के,
वक्त के साथ चल ,
वरना पगडंडियों पर ज़िन्दगी की ,
तू फिसल जाएगा!!!!

2 comments:

  1. bhut badhiya ...shuruwaat kafi achi hai...meri duayen tere saath hai..bhut agey jaege..

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